• Existence
    • Perception
    • Cosmos
    • Destiny
    • Totality

Beyond Mind

Search

Whoz Online

We have 30 guests and no members online

Blogging Here

Print

मैं ख़्याल हूँ किसी और का

     
   
     

मैं ख़्याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है,

सरे-आईना मेरा अक्स है, पसे-आइना कोई और है।

 

मैं किसी की दस्ते-तलब में हूँ तो किसी की हर्फ़े-दुआ में हूँ,

मैं नसीब हूँ किसी और का, मुझे माँगता कोई और है।

 

अजब ऐतबार-ओ-बे-ऐतबार के दरम्यान है ज़िंदगी,

मैं क़रीब हूँ किसी और के, मुझे जानता कोई और है।

 

तेरी रोशनी मेरे खद्दो-खाल से मुख्तलिफ़ तो नहीं मगर,

तू क़रीब आ तुझे देख लूँ, तू वही है या कोई और है।

Print

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

     
   
     

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए

 

उम्र भर मिलते रहे फिर भी न मिलने पाए

इस तरह मिल कि मुलाक़ात मुकम्मल हो जाए

 

दिन में बिखरा हूँ बहुत रात समेटेगी मुझे

तू भी आ जा तो मिरी ज़ात मुकम्मल हो जाए

Print

जख़्म इस जख़्म पे तहरीर किया जाएगा

     
   
     

जख़्म इस जख़्म पे तहरीर किया जाएगा
क्या दोबारा मुझे दिल-गीर किया जाएगा

उस की आँखों में खड़ा देख रहा हूँ ख़ुद को
कौन से पल मुझे तस्ख़ीर किया जाएगा

मेरी आँखों में कई ख़्वाब अधूरे हैं अभी
क्या मुकम्मल इन्हें ताबीर किया जाएगा

मुझ को बेकार में हैरत ने पकड़ रक्खा है
शहर तो दश्‍त में तामीर किया जाएगा

Print

जो मिल गई हैं निगाहें कभी निगाहों से

 

     
   
     

जो मिल गई हैं निगाहें कभी निगाहों से

गुज़र गई है मोहब्बत हसीन राहों से

 

चराग़ जल के अगर बुझ गया तो क्या होगा

मुझे न देख मोहब्बत भरी निगाहों से

 

बला-कशों की अँधेरी गली को क्या जाने

वो ज़िंदगी जो गुज़रती है शाह-राहों से

 

लबों पे मुहर-ए-ख़ामोशी लगाई जाएगी

दिलों की बात कही जाएगी निगाहों से

 

इधर कहा कि न छूटे सवाब का जादा

उधर सजा भी दिया राह को गुनाहों से

Print

झुका-झुका के निगाहें मिलाए जाते हैं

 

     
   
     

झुका-झुका के निगाहें मिलाए जाते हैं

बचा-बचा के निशाने लगाए जाते हैं

हुज़ूर जब से मेरे दिल पे छाए जाते हैं

ये हाल है कि क़दम डगमगाए जाते हैं

Print

रखना है तो फूलों को तू रख ले निगाहों में

 

     
   
     

रखना है तो फूलों को तू रख ले निगाहों में

ख़ुशबू तो मुसाफ़िर है खो जाएगी राहों में

 

क्यूँ मेरी मोहब्बत से बरहम हो ज़मीं वालो

इक और गुनह रख लो दुनिया के गुनाहों में

 

कैफ़ियत-ए-मय दिल का दरमाँ न हुई लेकिन

रंगीं तो रही दुनिया कुछ देर निगाहों में

 

काँटों से गुज़र जाना दुश्वार नहीं लेकिन

काँटें ही नहीं यारो कलियाँ भी हैं राहों में

Light in Life YouTube Videos

YOU MAY VISIT ALL THE VIDEOS OF PRATAP SHREE HERE

TOP