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बेहयाई, बेवफ़ाई, बेईमानी हर तरफ़ 

बेहयाई, बेवफ़ाई, बेईमानी हर तरफ़
धीरे-धीरे मर रहा आँखों का पानी हर तरफ़

सोचता हूँ नस्ले-नौ कल क्या पढ़ेगी ढूँढकर
पानियों पर लिख रही दुनिया कहानी हर तरफ़

फिर भी कुछ दिखता नहीं जबकि उजाला खूब है
रौशनी-सी, तीरगी की तर्जुमानी हर तरफ़

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गिला लिखूँ मैं अगर तेरी बेवफ़ाई का

गिला लिखूँ मैं अगर तेरी बेवफ़ाई का
लहू में ग़र्क़ सफ़ीना हो आशनाई का

ज़बाँ है शुक्र में क़ासिर शिकस्ता-बाली के
कि जिनने दिल से मिटाया ख़लिश रिहाई का

मिरे सजूद की दैरो-हरम से गुज़री क़द्र
रखूँ हूँ दावा तिरे दर पे जुब्बासाई का

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दिखावा है मुहब्बत का किसी की ऐतबारी क्या

     
   
     

दिखावा है मुहब्बत का किसी की ऐतबारी क्या
सभी हैं मस्त अपने में जमूरा क्या मदारी क्या

 

पठनवा ढूंडता फ़िरता लिए वो हाथ में लठवा
तू लम्बी तान के सोया, चुका दी है उधारी क्या

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मुमकिन नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो

 

मुमकिन[1] नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो
काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो

 

क्या लुत्फ़े-इन्तज़ार[2] जो तू हीला-जू[3] न हो
किस काम का विसाल[4] अगर आरज़ू[5] न हो

 

ख़लवत[6] में तुझको चैन नहीं किसका ख़ौफ़ है
अन्देशा कुछ न हो जो नज़र चार-सू[7] न हो

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कभी तो राहे-मुहब्बत में ये कमाल दिखे 


कभी तो राहे-मुहब्बत में ये कमाल दिखे
बिना बताये उसे मेरे दिल का हाल दिखे

 

बहार आती है तो फूल भी निखरते हैं
है दिल में प्यार तो गालों पे भी गुलाल दिखे

 

दिल उसकी सारी ख़ताएं मुआफ़ कर देगा
बस उस की आँखों में इक मरतबा मलाल दिखे

 

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि, हर ख़्वाहिश पे दम निकले

 

 

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि, हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा क़ातिल, क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो ख़ूँ, जो चश्मे-तर[1] से उम्र यूँ दम-ब-दम[2] निकले

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