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हँसी मासूम सी बच्चों की कापी में इबारत सी

हँसी मासूम सी बच्चों की कापी में इबारत सी
हिरन की पीठ पर बैठे परिन्दे की शरारत सी

वो जैसे सर्दियों में गर्म कपड़े दे फ़क़ीरों को
लबों पे मुस्कुराहट थी मगर कैसी हिक़ारत सी

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ख़्वाबों की ताबीर तुम्हारी आँखों में है


ख़्वाबों की ताबीर तुम्हारी आँखों में है,
शोख़ जवाँ कश्मीर तुम्हारी आँखों में है।

तुझमें है ताबीर मोहब्बत की भीतर तक,
शायर गालिब-मीर तुम्हारी आँखों में है।

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हर तरफ आपका क़िस्सा हैं जहाँ से सुनिए

 

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए

हर तरफ आपका क़िस्सा हैं जहाँ से सुनिए

सबको आता नहीं दुनिया को सता कर जीना

ज़िन्दगी क्या है मुहब्बत की ज़बां से सुनिए

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हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है

 
हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है
ये तर्ज़, ये अन्दाज-ए-सुख़न हमसे चला है

 
अरमान हमें एक रहा हो तो कहें भी
क्या जाने, ये दिल कितनी चिताओं में जला है

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हम को मन की शक्ति देना
 

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करे
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करे

 

भेदभाव अपने दिल से साफ़ कर सके
दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सके
झूठ से बचे रहे, सच का दम भरे
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करे

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छुप के आता है कोई ख़्वाब चुराने मेरे

   
     

छुप के आता है कोई ख़्वाब चुराने मेरे
फूल हर रात महकते हैं सिरहाने मेरे


बंद आँखों में मेरी झाँकते रहना उनका
शब बनाती है यूँ ही लम्हे सुहाने मेरे

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