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The Life & The Logic (Hindi)

The Life and the Logic


 

मन के लिये Logic सुविधाजनक है। Logical चीज विकल्प देती है। किसी एक को छाँटने की सुविधा देती है। जो A है वह B नहीं हो सकता। जो B है वह C नहीं हो सकता। क्योंकि यही तर्क है। यही Logical है कि सब स्पष्ट हो, अलग अलग हो। पहचान में गड़बड़ ना हो। यह सुविधाजनक है।तर्क या Logic समझ का विषय है। यह वस्तुओं, विचारों और बातों के बीच की consistency है, संगति है। यदि दिए गए Facts आपस में Consistent हैं तो आप उन्हें Logical मानते हैं। तर्क से बहुत मानसिक सुकून मिलता है। मन को सच्चाई पा जाने का संतोष होता है। मन को Logic में ही सत्य नजर आता है। यदि कोई बात Logical है तो आपको लगता है कि वही अंतिम सत्य है।

परन्तु जीवन में ठीक ठीक ऐसा नहीं है। A के B हो जाने में कोई समस्या नहीं है। पूरा काव्य प्रियतम के मुखड़े और चाँद के एक हो जाने में ही है। वही व्यक्ति किसी के प्रति महान आसक्त और वही व्यक्ति किसी दूसरे के प्रति पूरा विरक्त हो सकता है। एक ही व्यक्ति मे आसक्ति और विरक्ति एक साथ हो सकती है। ऐसे ही उसमें दानशीलता और कृपणता एक साथ हो सकते हैं। जो स्थान एक दृष्टिकोण से ठंडा होगा वही दूसरे दृष्टिकोण से गरम होगा। बर्फीले पहाड़ों में गर्म पानी का चश्मा हो सकता है। धूप और बारिश एक साथ हो सकते हैं। यहाँ जन्म है, मृत्यु है, सुख है दुख है। बचपन है बुढ़ापा है। बुढ़ापे में आदमी बचपन जैसा हो जाता है। यह अतार्किक हो सकता है लेकिन जीवन में होता है। जीवन तर्क के Logic के दायरे से बाहर तक फैला है। यह Logic से अधिक विस्तृत है।

Logic अंतर्विरोधों की बात करता है। जिसमें Contradiction है Logic उसे मना कर देता है। यह बहुत सरल है। परन्तु जीवन में इतनी सरलता उपलब्ध नहीं है। यह अंतर्विरोधों से Contradictions से भरपूर है। एक ही जीवन में स्वार्थ – परमार्थ, प्रेम – घृणा, साहस – भीरुता, हास्य – रुदन सभी कुछ होता है। और इसमें कुछ अंतर्विरोध या Contradiction नहीं है।

यह आपके मन की बनावट है, मन बना ही ऐसा है कि उसे Logic अच्छा लगता है। जैसे किसी आदमी को मीठा अच्छा लगता है और किसी को चटपटा अच्छा लगता है। किसी एक स्वाद के पीछे लगने से आप भोजन के पूरे रस से वंचित रह सकते हो। उसी तरह मन के चटकारे Logic के पीछे लग जाने से आप जीवन के पूरे रस से वंचित रह सकते हो।

आज के जीवन की विडम्बना यही Logic के पीछे की भागदौड़ है। मशीन की तरह काम करने से अधिक काम होगा, अधिक पैसा होगा, बड़ा घर होगा, ऊँचा स्टेटस होगा। यह बहुत तार्किक है, Logical है। और आप इस चक्र में दौड़ रहे हैं। जैसे घोड़े के सिर पर 2 फुट दूरी पर हरी घास बाँधने से घोड़ा घास के लिए हमेशा दौड़ता है। बिलकुल Logical तरीके से। घास की तरफ दौड़ना Logical है। जैसे आप काम, पैसा, गाड़ी, मकान के पीछे दौड़ रहे हैं, Logical तरीके से। पर इससे आपके भीतर का जीवन खतम हो गया है। कभी ध्यान से बैठ सको तो देखोगे कि आप वहाँ हो ही नहीं। वहाँ तो Logic भरा पड़ा है। Logic ने आपको आपके भीतर से बाहर खदेड़ दिया है। जीवन का नृत्य थाम दिया है। संगीत बंद कर दिया है। संगीत Logical नहीं है। नृत्य Logical नहीं है। आप के भीतर आपका आपा Logical नहीं है।

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