Print

मेरा हुस्न-ए-नज़र है सब कुछ

मेरा हुस्न-ए-नज़र है सब कुछ 

तेरा चेहरा न मेरा हुस्न-ए-नज़र है सब कुछ

हाँ मगर दर्द-ए-दिल-ए-ख़ाक-बसर है सब कुछ

 

मेरे ख़्वाबों से अलग मेरे सराबों से जुदा
इस मोहब्बत में कोई वहम मगर है सब कुछ

 

बात तो तब है के तू भी हो मुक़ाबिल मेरे
जान-ए-मन फिर तेरा ख़ंजर मेरा सर है सब कुछ

 

तेरी मर्जी है इसे चाहे तो सैराब करे
इस बयाबाँ को तेरी एक नज़र है सब कुछ

 

मिस्ल-ए-मज़्मून-ए-ग़ज़ल कुछ नहीं ये हिज्र ओ विसाल
हाँ वही यार तरह-दार मगर है सब कुछ 
/ 'महताब' हैदर नक़वी