• Existence
    • Perception
    • Cosmos
    • Destiny
    • Totality

Beyond Mind

Search

Whoz Online

We have 59 guests and no members online

Shayari

images/website/shayari/writing.jpg
Print

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

     
   
     

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए

 

उम्र भर मिलते रहे फिर भी न मिलने पाए

इस तरह मिल कि मुलाक़ात मुकम्मल हो जाए

 

दिन में बिखरा हूँ बहुत रात समेटेगी मुझे

तू भी आ जा तो मिरी ज़ात मुकम्मल हो जाए

Print

जख़्म इस जख़्म पे तहरीर किया जाएगा

     
   
     

जख़्म इस जख़्म पे तहरीर किया जाएगा
क्या दोबारा मुझे दिल-गीर किया जाएगा

उस की आँखों में खड़ा देख रहा हूँ ख़ुद को
कौन से पल मुझे तस्ख़ीर किया जाएगा

मेरी आँखों में कई ख़्वाब अधूरे हैं अभी
क्या मुकम्मल इन्हें ताबीर किया जाएगा

मुझ को बेकार में हैरत ने पकड़ रक्खा है
शहर तो दश्‍त में तामीर किया जाएगा

Print
     
   
     

हुस्न - ए - गुमराह

मुझ को मालूम है तू हुस्न में लासानी है
सारी दुनिया तेरी सौदाई है दीवानी है
तेरी आँखों में है कैफियत ए जाम ए मयनाब
सौ बहारों का है आईना तेरा हुस्न ए शबाब
रुख़ ए रंगीं से तेरे फूल भी शरमाते हैं
सामने आते हुए डरते हैं कतराते हैं
काली जुल्फें तेरी लहराती हैं जब शानों पर

Print

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि, हर ख़्वाहिश पे दम निकले

 

 

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि, हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा क़ातिल, क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो ख़ूँ, जो चश्मे-तर[1] से उम्र यूँ दम-ब-दम[2] निकले

Print

छुप के आता है कोई ख़्वाब चुराने मेरे

   
     

छुप के आता है कोई ख़्वाब चुराने मेरे
फूल हर रात महकते हैं सिरहाने मेरे


बंद आँखों में मेरी झाँकते रहना उनका
शब बनाती है यूँ ही लम्हे सुहाने मेरे

Print

एक बेनाम महबूब के नाम

     
   
     

चाहता हूँ कि तेरा रूप मेरी चाह में हो

तेरी हर साँस मेरी साँस की पनाह में हो

 

मेरे महबूब तेरा ख़ुद का ज़िस्म न हो

मेरे एहसास की मूरत कोई तिलिस्म न हो

 

ढूँढता फिरता हूँ हर सिम्त भुला के ख़ुद को

अपनी पोशीदा रिहाइश का पता दे मुझको

Light in Life YouTube Videos

YOU MAY VISIT ALL THE VIDEOS OF PRATAP SHREE HERE

TOP