• Existence
    • Perception
    • Cosmos
    • Destiny
    • Totality

Search

Whoz Online

We have 72 guests and no members online

Print

WAY TO YOUR AWAKENING

WAY TO YOUR AWAKENING

 

अध्यात्म में बहुत संशय और संदेह हो गया है। आस्तिक दर्शन अजर और अमर आत्मा की बात करते हैं। बौद्ध लोग आत्मा और परमात्मा के सवाल पर मौन हो जाते हैं। जैनियों के लिये आत्मा शरीर के आकार के अनुसार छोटी बड़ी हो सकती है। आधुनिक वैज्ञानिक भी हैं जो संसार में सामने दिखाई पड़ता है उसी को सत्य कहते हैं। सनातनी हिन्दु लोग स्वर्ग और नरक की बातें करते हैं। वे मूर्ति पूजा की बात करते हैं, लेकिन नबीमूलक लोग मूर्तिपूजा को गलत कहते हैं। साँख्य दार्शनिक प्रकृति और पुरुष की सत्ता मानते हैं जबकि शंकराचार्य के वेदान्ती कहते हैं कि केवल ब्रह्म ही सत्य है बाकी सब मिथ्या है। गीता पढ़ने वाले विद्वान कर्मयोग को उत्तम कहते हैं जबकि विष्णु पुराण के पाठक भक्तियोग को सर्वोत्तम मानते हैं। विज्ञान भैरव ने ज्ञान को बेकार का बोझ बताया है जबकि शिवसंहिता में ज्ञान की अनन्तता की बात कही गई है। विवेकानन्द सांसारिक कल्याण के लिए अध्यात्म के उपयोग की बात करते हैं जबकि ओशो वैयक्तिक जागरण का आह्वान कर रहे हैं। सामान्य जन के लिये बहुत ऊहापोह है Confusion है। स्पष्ट नहीं है कि क्या किया जाना है।

जहाँ से मैं देख पाता हूँ वहाँ से लगता है कि ये सब सत्य उन मनीषियों के द्वारा देखे जाने वाले भिन्न भिन्न शिखर हैं। जो बुद्ध ने देखा वह जीसस से अलग देखा। जो मुहम्मद ने देखा वह महावीर से अलग है। जो विवेकानन्द ने देखा वह अष्टावक्र से भिन्न है। इसलिये इन देखे गये सत्यों से आपको कुछ ना मिलेगा। वे पहले ही देखे जा चुके हैं। पुराने हो चुके हैं। उन्हें फिर फिर देखने से केवल पुनरुक्ति हो जाएगी। जो इन्होंने देखे वह इन मनीषियों के सत्य थे। आपका सत्य इनसे भिन्न हो सकता है। क्योंकि आप इन मनीषियों से भिन्न हैं। सत्य कभी पुराना नहीं है मैला नहीं है। वह हमेशा नया मिलेगा। इसलिये जब भी आप खुद को इन पुराने रास्तों पर बाँध लोगे तो आपके सत्य तक ले जाने वाला आपका व्यक्तिगत रास्ता भूल जाएगा।

आपका सत्य आपका व्यक्तिगत सत्य है। यह बिल्कुल नया है। उस पर आज तक कोई नहीं गया है। आप के बाद भी उस पर कोई ना जा पाएगा। आप पहले और अंतिम व्यक्ति उस पर जाएँगे। अगर आप ने खुद को किसी पुराने रास्ते पर बाँध लिया तो आपकी निजता का रास्ता तलाशने की सब संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। वह पुराना रास्ता आपको कहीं ना ले जा पाएगा। पुराने रास्ते से नए सत्य को तलाशना असंभव है। यह एक चूक है।

आपने क्या कभी देखा कि महावीर किसी दूसरे के रास्ते चले? क्या राम या कृष्ण कभी दूसरे के रास्ते चले? या जो भी महावीर के रास्ते चले, वे कभी महावीर बन पाए? राम या कृष्ण बन पाए? यदि हजारों वर्षों में ऐसा ना हो पाया तो आपके साथ हो पाएगा और आप बुद्ध, जीसस या विवेकानन्द बन पाएँगे – इसकी क्या गारन्टी है? और अगर किसी तरह कर करा के आप बन भी गए तो क्या महत्त्वपूर्ण घटित होगा? आप तो मात्र एक डुप्लीकेट पीस से ज्यादा कुछ हो नहीं पाओगे। क्या आप एक डुप्लीकेट भर हो जाने के लिये ही सब उपक्रम करना चाहते हैं। तब तो आप इस अनमोल जीवन को बहुत सस्ते में दाँव पर लगा रहे हैं। एक बार फिर सोच लीजिए।

ये पहले से बने बनाए रास्ते आपको बहुत ललचाते हैं। ये चमकदार जो हैं। महावीर, बुद्ध, राम, कृष्ण, जीसस और विवेकानन्द इन पर चले हैं। ये अवश्य ही सुन्दर मार्ग होंगे। पर ये आपके मार्ग नहीं हैं। ये आपके लिये नहीं हैं। ये जिनके लिये थे वे इन पर चले। मंजिल को पहुँचे। आपका रास्ता अलग है। यह आपकी निजता से निकलेगा। आप अपना मार्ग खुद तलाशना होगा। वही आपकी खोज होगी। जिस दिन आप अपनी मंजिल को और अपने मार्ग को तलाश लेंगे उस दिन आप स्वयं ऋषि हो जाएँगे। फिर आप जो भी वक्तव्य दोगे, आपका वह वक्तव्य उपनिषद् हो जाएगा। आपका कहा हुआ वाक्य आप्तवाक्य कहलाएगा।

स्वयं की खोज से पहले कोई सत्य जाना नहीं जा सकता। जो भी आप आत्मा, परमात्मा या प्रकृति के बारे में कहते हैं वह दूसरे के वक्तव्य को दोहरा रहे हैं। जो भी आप कहते हैं वह Hearsay बात है, सुनी सुनाई, रटी रटाई कहानी है। जो बात दूसरों ने आपको बताई थी, उसी का रिपीटीशन है। आपकी आत्मा, आपका परमात्मा यह एक कहानी से ज्यादा सत्य न होगा। यह तो दूसरों के द्वारा दी गई सूचना भर है। बिना तस्दीक के, Unverified.

पर यह सत्य का मार्ग कहाँ से आएगा? यदि दूसरों के बताए ना आएगा तो फिर कैसे आएगा ? यह आपको स्वयं ढूँढना होगा। इतना आसान नहीं है। कबीर कहते हैं कि जो घर फूँके आपनो वो चले हमारे साथ। इससे कम कीमत पर ईश्वर को, आत्मा को उपलब्ध करवा देने वाले लोग गंभीर लोग नहीं है। आत्मा और परमात्मा को पाना है तो उनसे जुगत मत बैठा लेना। ये मानव सभ्यता के हजारों सालों को बर्बाद कर देने वाले लोग हैं। पाखण्ड बेचते हैं। इनसे सावधान रहना होगा। सिर्फ अपने पे भरोसा करना होगा। आपसे अधिक Authentic कोई दूसरा नहीं हो सकता। दूसरों का सत्य पुराना पड़ चुका है। ?

इस खोज के लिये आपको अपने भीतर जाना होगा। और अकेले ही जाना होगा। दूसरे के साथ में जाने का कोई उपाय नहीं होगा। अधिक से अधिक कोई दूसरा कोई गुरू कोई गाईड इतना कर सकता है कि आपको हल्का सा इशारा भर कर दे कि उस तरफ वहाँ कुछ है। बाकी तलाश आपकी होगी। दूसरे की तलाश और उनके द्वारा प्राप्त परिणाम आपको केवल चकाचौंध से भर सकते हैं प्रकाशित नहीं कर सकते हैं। जब भी आप प्रकाश चाहेंगे तो भीतर की यात्रा पर स्वयं चलना होगा। यह आपकी साधना का प्रारम्भिक बिन्दु होगा। पर Authentic होगा। इस प्रारम्भिक बिन्दु पर पहुँच पाना ही उपलब्धि है।

यह पूरी Video Youtube के Light in Life by Pratap Shree चैनल पर उपलब्ध है। नीचे दिये लिंक को क्लिक करके आप इस चैनल पर पहुँच सकते हैं।

इस जैसी अन्य विडियोज के बारे में अपडेट रहने के लिये आप इस चैनल को सब्सक्राईब कर सकते हैं.

 

Light in Life YouTube Videos

YOU MAY VISIT ALL THE VIDEOS OF PRATAP SHREE HERE

TOP